क्रिस्टियानो रोनाल्डो एक ऐसा नाम है, जो हाथ से नहीं, पैरों से जादू करता है. ऐसा खिलाड़ी, जिसके पास धार भी है और रफ्तार भी. इस खिलाड़ी की तेज ड्रिबल और तूफानी रफ्तार का हर फुटबॉल प्रेमी दीवाना है तो डी में मिलने वाले क्रॉस पर बेहद चतुराई से किए गए गोल पर हर प्रतिद्वंद्वी बेबस. रोनाल्डो के खेल की असली परीक्षा ब्राजील में होने वाले फुटबॉल विश्व कप में होगी, जहां उनके ऊपर देश का विश्व विजेता बनाने का दबाव होगा तो बराबर की टक्कर में खड़े मेसी से आगे निकलने की जोर आजमाइश भी.
पुर्तगाली खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने आखिरकार फुटबॉल के बादशाह लॉयोनेल मेसी से उनका ताज छीन ही लिया. रोनाल्डो को फीफा ने वर्ष 2013 का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित करते हुए बैलॉन डिऑर के खिताब से सम्मानित किया. पुर्तगाल की ऐतिहासिक पहचान लहरों से खेलने वालों की है, लेकिन एक पुर्तगाली(क्रिस्टियानो रोनाल्डो) फुटबॉल के मैदान में लहरों की तरह लहराता दिखाई देता है. फिलहाल उसे रोक पाना किसी के वश में नहीं है. वह गोल पर गोल दागता जा रहा है और सफलता के नये आयाम रचता जा रहा है. विश्व फुटबॉल जगत में अर्जेंटीना के लॉयोनेल मेसी ही एकमात्र खिलाड़ी हैं, जो उन्हें सीधे तौर पर चुनौती देते नजर आते हैं. आज से चार साल पहले 2008 में रोनाल्डो पहली बार फीफा प्लेयर ऑफ द् इयर चुने गए थे. उस समय चैंपियंस लीग में मैनचेस्टर यूनाइटेड की जीत का सेहरा उन्हीं के सिर बंधा था. इस बार रोनाल्डो को कुल 27.99 और मेसी को 24.72 प्रतिशत वोट मिले. तीसरे स्थान पर बायर्न म्यूनिख के फ्रांसीसी खिलाड़ी फ्रांक रिबेरी रहे. उन्हें 23.99 फीसद वोट हासिल हुए.
2008 के बाद लगातार चार साल मेसी के नाम रहे. मेसी 2009 से 2012 तक लगातार चार बार फीफा प्लेयर ऑफ द इयर चुने गए. मेसी बेहतरीन ड्रिबलिंग का जादू दिखाते रहे और दनादन गोल करते रहे. नतीजतन वे विश्व फुटबॉल के नये बादशाह बन गए. रोनाल्डो हर साल सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर के अवॉर्ड से चंद कदम की दूरी पर रह जाते थे. रोनाल्डो को जीतना पसंद है, इसलिए उन्होंने हार नहीं मानी. इस दौरान मेसी इतिहास बन रहे थे और रोनाल्डो उस इतिहास को चुनौती दे रहे थे. हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं और रोनाल्डो ने बाजी जीतकर खुद को फुटबॉल जगत का बाजीगर साबित कर दिया है.
इस साल मेसी चोट की वजह से कई बार मैदान के बाहर बैठना पड़ा है. इस वजह से ही अटकलें लग रहीं थीं कि शायद मेसी लगातार पांचवीं बार बैलॉन डिऑर के खिताब पर कब्जा नहीं कर पाएंगे. रोनाल्डो इस राह में सबसे बड़ा रोडा हैं और वह बेहतरीन फुटबॉल खेल रहे हैं. रोनाल्डो ने वर्ष 2013 में कुल 59 मैच खेले. इस दरमियान उन्होंने आठ मैंचों में हैट्रिक लगाई और कुल 69 गोल किए. पिछले साल रोनाल्डो हर मैच में औसतन एक गोल (1.1%) कर रहे थे. उनका प्रत्येक गोल उन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के खिताब की ओर ले जा रहा था. रोनाल्डो ने पिछले कुछ सीजन बहुत कंसिसटेंट प्रदर्शन किया. इस वजह से उनका आत्मविश्वास बढ़ा हुआ था और वह बेहतरीन फॉर्म में नज़र आए.
फिलहाल रोनाल्डो अपने खेल के चरम पर हैं. वह दुनिया के सबसे मंहगे फुटबॉल खिलाड़ी हैं. रियाल ने 2009 में लगभग 10 करोड़ यूरो (800करोड़ रुपये) में रोनाल्डो को खरीदा, जो फुटबॉल के इतिहास के सबसे महंगे सौदों में गिना जाता है. जब वह इंग्लिश क्लब मैंचेस्टर यूनाइटेड ट्रांसफर होकर रियल मैड्रिड पहुंचे, तब से उन्हें अनुबंध के तहत फीस के रूप में सालान लगभग 170 करोड़ रुपये मिल रहे हैं. रियाल मैड्रिड में आते ही रोनाल्डो गोल मशीन में तब्दील हो गए. रीयाल के लिए खेलते हुए उन्होंने 2009-10 सीजन में 33, 2010-11 में 54, 2011-12 में 60 और 2012-13 में 69 गोल किए. यह ट्रेंड बताता है कि समय के साथ उनके खेल में सुधार हुआ है. यदि ऐसा ही चलता रहा तो वे मेसी से आगे निकलकर सफलता के नये मुकाम पर पहुंचेंगे. यूरो-2012 में रोनाल्डो अपने दम पर टीम को सेमीफाइनल तक ले गए. स्पेन भले ही चैंपियन बना, लेकिन रोनाल्डो की अगुवाई में सेमीफाइनल में पुर्तगाल ने उसकी हालत खस्ता कर दी थी. रोनाल्डो एंड कंपनी ने स्पेन को नचा दिया. पेनल्टी से निकले नतीजे में स्पेन भाग्यशाली साबित हुआ. उनकी मदद से रियाल ने पिछले साल ला लीगा का खिताब जीता और उनकी टीम चैंपियंस लीग के सेमीफाइनल तक पहुंची. हफ्ते दर हफ्ते रोनाल्डो ने विशाल चुनौतियों का सामना किया. उन्होंने बेहद खराब परिस्थितियों में भी टीम के लिए गोल किए और टीम को संकट से निकालकर जीत के रास्ते पर लाए.
रोनाल्डो 2003 से पुर्तगाल की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं. उनके पास दो फीफा विश्व कप खेलने का अनुभव है. उन्होंने अब तक पुर्तगाल के लिए कुल 109 मैच खेले हैं और कुल 47 गोल किए हैं. विश्व कप में वह केवल दो गोल कर सके हैं. एक गोल उन्होंने 2006 के विश्व कप में और दूसरा 2010 के विश्व कप में किया था. वह संयुक्त रूप से पुर्तगाल के लिए सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं. वे सबसे कम उम्र में 100 मैचों में देश का प्रतिनिधत्व करने वाले तीसरे यूरोपीय खिलाड़ी हैं.
फिलहाल दुनिया में प्रशंसकों दो धड़े में बटे हुए हैं या तो वे मेसी के प्रशंसक हैं या रोनाल्डो के. प्रशंसकों का मानना है कि रोनाल्डो बतौर खिलाड़ी मेसी से बेहतर हैं. मेसी के साथ मैदान पर दुनिया के और भी बेहतरीन खिलाड़ी खेल रहे होते हैं. उनके खेल का फायदा भी मेसी को गोल के रूप में मिल जाता है. इसलिए गोल स्कोर करने के मामले में मेसी उनसे आगे दिखाई पड़ते हैं. रोनाल्डो में एक औसत टीम में भी जान फूंकने की क्षमता है. वे अपने कौशल के दम पर गोल करने के मौके बनाते हैं. यह एक खिलाड़ी के रूप में उन्हें स्थापित करता है.
अधिकांश लोग मेसी को एक अहंकारी व्यक्ति मानते हैं. रोनाल्डो से इस बारे में पूछने पर वे कहते हैं कि हमेशा जीतना पसंद है. इसके लिए मैं हर संभव कोशिश करता हूं. शायद इसी वजह से लोगों को मैं घमंडी लगता हूं. मैं ज्यादातर अपने करीबियों और दोस्तों के साथ रहना पसंद करता हूं. फुटबॉल से मुझे बहुत लगाव है, इसलिए मैदान पर मैं सिर्फ जीत दर्ज करने लिए जाता हूं. इसलिए यदि लोग मुझे एरोगेंट कहें तो मुझे कोई परवाह नहीं है. मेसी की पहचान विनम्र स्वभाव के आक्रामक खिलाड़ी की है. प्रशंसक और पत्रकार उन्हें बेहद पसंद करते हैं. रोनाल्डो को लगता है कि कुछ लोग इसी वजह से मेसी के पक्ष में वोट कर देते हैं, जबकि वोटिंग के दौरान पिछले साल इस खिलाड़ी ने खेल के मैदान पर क्या किया, इस आधार पर वोट पड़ने चाहिए. जैसे कि उसने अपनी टीम के लिए कितने मैच जीते, अपनी टीम को कौन कौन से खिताब जिताए. इन बातों का वोट देते वक्त ख्याल किया जाना चाहिए. गौरतलब हो कि फीफा के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का चुनाव राष्ट्रीय कोचों, राष्ट्रीय टीमों के कप्तानों और वैश्विक मीडिया के सदस्यों के वोटों से होता है. इन वोटों के मामलों में कई बार रोनाल्डो पीछे रह जाते हैं. रोनाल्डो का बैलॉन डिऑर के बार में कहना है कि निश्चित तौर पर इसे जीतना अच्छा लगता है, लेकिन इसके साथ ही दुनिया नहीं खत्म हो जाती. कई बार महान खिलाड़ियों को भी यह पुरस्कार नहीं मिला है, इसलिए अफसोस नहीं करना चाहिए.
रोनाल्डो 2003 से पुर्तगाल की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं. उनके पास दो फीफा विश्व कप खेलने का अनुभव है. उन्होंने अब तक पुर्तगाल के लिए कुल 109 मैच खेले हैं और कुल 47 गोल किए हैं. विश्व कप में वह केवल दो गोल कर सके हैं. एक गोल उन्होंने 2006 के विश्व कप में और दूसरा 2010 के विश्वकप में किया था. वह संयुक्त रूप से पुर्तगाल के लिए सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं. वे सबसे कम उम्र में 100 मैचों में देश का प्रतिनिधत्व करने वाले तीसरे यूरोपीय खिलाड़ी हैं. उनके पास फुटबॉल खेलने का एक दशक का अनुभव है. इस साल ब्राजील में होने वाले विश्व कप में उनकी प्रतिष्ठा दांव पर रहेगी. साथ ही उनके पास उनके पास खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने का भी बेहतरीन मौका है. क्लब स्तर पर रोनाल्डो और मेसी दोनों बेहद सफल रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दोनों ही खिलाड़ी बौने से नज़र आते हैं. रोनाल्डो अपने खेल के सबसे बेहतरीन दौर से गुजर रहे हैं. वह पुर्तगाल के कप्तान भी हैं. अपने कप्तान पर पुर्तगालियों को भरोसा है कि वही विश्व कप में उनकी नौका को पार लगा सकते हैं. एक परिपक्व और अनुभवी कप्तान से विश्व कप की आशा करना बेमानी नहीं है. देशवासियों की आशाओं का बोझ कंधों पर लिए रोनाल्डो कैसे विश्व चैंपियन बनते हैं, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा. यदि रोनाल्डो ऐसा करने में कामयाब होते हैं तो वह मेसी से बहुत आगे पहुंच जाएंगे. आशा है कि उनके प्रदर्शन का यह दौर चलता रहेगा और इस साल ब्राजील में होने वाले फीफा विश्व कप में वो दनादन गोल करते दिखाई देंगे.
brajesh upadhyay
सोमवार, 10 मार्च 2014
फुटबॉल का बा़जीगर
क्रिस्टियानो रोनाल्डो एक ऐसा नाम है, जो हाथ से नहीं, पैरों से जादू करता है. ऐसा खिलाड़ी, जिसके पास धार भी है और रफ्तार भी. इस खिलाड़ी की तेज ड्रिबल और तूफानी रफ्तार का हर फुटबॉल प्रेमी दीवाना है तो डी में मिलने वाले क्रॉस पर बेहद चतुराई से किए गए गोल पर हर प्रतिद्वंद्वी बेबस. रोनाल्डो के खेल की असली परीक्षा ब्राजील में होने वाले फुटबॉल विश्व कप में होगी, जहां उनके ऊपर देश का विश्व विजेता बनाने का दबाव होगा तो बराबर की टक्कर में खड़े मेसी से आगे निकलने की जोर आजमाइश भी.
पुर्तगाली खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने आखिरकार फुटबॉल के बादशाह लॉयोनेल मेसी से उनका ताज छीन ही लिया. रोनाल्डो को फीफा ने वर्ष 2013 का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी घोषित करते हुए बैलॉन डिऑर के खिताब से सम्मानित किया. पुर्तगाल की ऐतिहासिक पहचान लहरों से खेलने वालों की है, लेकिन एक पुर्तगाली(क्रिस्टियानो रोनाल्डो) फुटबॉल के मैदान में लहरों की तरह लहराता दिखाई देता है. फिलहाल उसे रोक पाना किसी के वश में नहीं है. वह गोल पर गोल दागता जा रहा है और सफलता के नये आयाम रचता जा रहा है. विश्व फुटबॉल जगत में अर्जेंटीना के लॉयोनेल मेसी ही एकमात्र खिलाड़ी हैं, जो उन्हें सीधे तौर पर चुनौती देते नजर आते हैं. आज से चार साल पहले 2008 में रोनाल्डो पहली बार फीफा प्लेयर ऑफ द् इयर चुने गए थे. उस समय चैंपियंस लीग में मैनचेस्टर यूनाइटेड की जीत का सेहरा उन्हीं के सिर बंधा था. इस बार रोनाल्डो को कुल 27.99 और मेसी को 24.72 प्रतिशत वोट मिले. तीसरे स्थान पर बायर्न म्यूनिख के फ्रांसीसी खिलाड़ी फ्रांक रिबेरी रहे. उन्हें 23.99 फीसद वोट हासिल हुए.
2008 के बाद लगातार चार साल मेसी के नाम रहे. मेसी 2009 से 2012 तक लगातार चार बार फीफा प्लेयर ऑफ द इयर चुने गए. मेसी बेहतरीन ड्रिबलिंग का जादू दिखाते रहे और दनादन गोल करते रहे. नतीजतन वे विश्व फुटबॉल के नये बादशाह बन गए. रोनाल्डो हर साल सर्वश्रेष्ठ फुटबॉलर के अवॉर्ड से चंद कदम की दूरी पर रह जाते थे. रोनाल्डो को जीतना पसंद है, इसलिए उन्होंने हार नहीं मानी. इस दौरान मेसी इतिहास बन रहे थे और रोनाल्डो उस इतिहास को चुनौती दे रहे थे. हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं और रोनाल्डो ने बाजी जीतकर खुद को फुटबॉल जगत का बाजीगर साबित कर दिया है.
इस साल मेसी चोट की वजह से कई बार मैदान के बाहर बैठना पड़ा है. इस वजह से ही अटकलें लग रहीं थीं कि शायद मेसी लगातार पांचवीं बार बैलॉन डिऑर के खिताब पर कब्जा नहीं कर पाएंगे. रोनाल्डो इस राह में सबसे बड़ा रोडा हैं और वह बेहतरीन फुटबॉल खेल रहे हैं. रोनाल्डो ने वर्ष 2013 में कुल 59 मैच खेले. इस दरमियान उन्होंने आठ मैंचों में हैट्रिक लगाई और कुल 69 गोल किए. पिछले साल रोनाल्डो हर मैच में औसतन एक गोल (1.1%) कर रहे थे. उनका प्रत्येक गोल उन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के खिताब की ओर ले जा रहा था. रोनाल्डो ने पिछले कुछ सीजन बहुत कंसिसटेंट प्रदर्शन किया. इस वजह से उनका आत्मविश्वास बढ़ा हुआ था और वह बेहतरीन फॉर्म में नज़र आए.
फिलहाल रोनाल्डो अपने खेल के चरम पर हैं. वह दुनिया के सबसे मंहगे फुटबॉल खिलाड़ी हैं. रियाल ने 2009 में लगभग 10 करोड़ यूरो (800करोड़ रुपये) में रोनाल्डो को खरीदा, जो फुटबॉल के इतिहास के सबसे महंगे सौदों में गिना जाता है. जब वह इंग्लिश क्लब मैंचेस्टर यूनाइटेड ट्रांसफर होकर रियल मैड्रिड पहुंचे, तब से उन्हें अनुबंध के तहत फीस के रूप में सालान लगभग 170 करोड़ रुपये मिल रहे हैं. रियाल मैड्रिड में आते ही रोनाल्डो गोल मशीन में तब्दील हो गए. रीयाल के लिए खेलते हुए उन्होंने 2009-10 सीजन में 33, 2010-11 में 54, 2011-12 में 60 और 2012-13 में 69 गोल किए. यह ट्रेंड बताता है कि समय के साथ उनके खेल में सुधार हुआ है. यदि ऐसा ही चलता रहा तो वे मेसी से आगे निकलकर सफलता के नये मुकाम पर पहुंचेंगे. यूरो-2012 में रोनाल्डो अपने दम पर टीम को सेमीफाइनल तक ले गए. स्पेन भले ही चैंपियन बना, लेकिन रोनाल्डो की अगुवाई में सेमीफाइनल में पुर्तगाल ने उसकी हालत खस्ता कर दी थी. रोनाल्डो एंड कंपनी ने स्पेन को नचा दिया. पेनल्टी से निकले नतीजे में स्पेन भाग्यशाली साबित हुआ. उनकी मदद से रियाल ने पिछले साल ला लीगा का खिताब जीता और उनकी टीम चैंपियंस लीग के सेमीफाइनल तक पहुंची. हफ्ते दर हफ्ते रोनाल्डो ने विशाल चुनौतियों का सामना किया. उन्होंने बेहद खराब परिस्थितियों में भी टीम के लिए गोल किए और टीम को संकट से निकालकर जीत के रास्ते पर लाए.
रोनाल्डो 2003 से पुर्तगाल की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं. उनके पास दो फीफा विश्व कप खेलने का अनुभव है. उन्होंने अब तक पुर्तगाल के लिए कुल 109 मैच खेले हैं और कुल 47 गोल किए हैं. विश्व कप में वह केवल दो गोल कर सके हैं. एक गोल उन्होंने 2006 के विश्व कप में और दूसरा 2010 के विश्व कप में किया था. वह संयुक्त रूप से पुर्तगाल के लिए सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं. वे सबसे कम उम्र में 100 मैचों में देश का प्रतिनिधत्व करने वाले तीसरे यूरोपीय खिलाड़ी हैं.
फिलहाल दुनिया में प्रशंसकों दो धड़े में बटे हुए हैं या तो वे मेसी के प्रशंसक हैं या रोनाल्डो के. प्रशंसकों का मानना है कि रोनाल्डो बतौर खिलाड़ी मेसी से बेहतर हैं. मेसी के साथ मैदान पर दुनिया के और भी बेहतरीन खिलाड़ी खेल रहे होते हैं. उनके खेल का फायदा भी मेसी को गोल के रूप में मिल जाता है. इसलिए गोल स्कोर करने के मामले में मेसी उनसे आगे दिखाई पड़ते हैं. रोनाल्डो में एक औसत टीम में भी जान फूंकने की क्षमता है. वे अपने कौशल के दम पर गोल करने के मौके बनाते हैं. यह एक खिलाड़ी के रूप में उन्हें स्थापित करता है.
अधिकांश लोग मेसी को एक अहंकारी व्यक्ति मानते हैं. रोनाल्डो से इस बारे में पूछने पर वे कहते हैं कि हमेशा जीतना पसंद है. इसके लिए मैं हर संभव कोशिश करता हूं. शायद इसी वजह से लोगों को मैं घमंडी लगता हूं. मैं ज्यादातर अपने करीबियों और दोस्तों के साथ रहना पसंद करता हूं. फुटबॉल से मुझे बहुत लगाव है, इसलिए मैदान पर मैं सिर्फ जीत दर्ज करने लिए जाता हूं. इसलिए यदि लोग मुझे एरोगेंट कहें तो मुझे कोई परवाह नहीं है. मेसी की पहचान विनम्र स्वभाव के आक्रामक खिलाड़ी की है. प्रशंसक और पत्रकार उन्हें बेहद पसंद करते हैं. रोनाल्डो को लगता है कि कुछ लोग इसी वजह से मेसी के पक्ष में वोट कर देते हैं, जबकि वोटिंग के दौरान पिछले साल इस खिलाड़ी ने खेल के मैदान पर क्या किया, इस आधार पर वोट पड़ने चाहिए. जैसे कि उसने अपनी टीम के लिए कितने मैच जीते, अपनी टीम को कौन कौन से खिताब जिताए. इन बातों का वोट देते वक्त ख्याल किया जाना चाहिए. गौरतलब हो कि फीफा के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का चुनाव राष्ट्रीय कोचों, राष्ट्रीय टीमों के कप्तानों और वैश्विक मीडिया के सदस्यों के वोटों से होता है. इन वोटों के मामलों में कई बार रोनाल्डो पीछे रह जाते हैं. रोनाल्डो का बैलॉन डिऑर के बार में कहना है कि निश्चित तौर पर इसे जीतना अच्छा लगता है, लेकिन इसके साथ ही दुनिया नहीं खत्म हो जाती. कई बार महान खिलाड़ियों को भी यह पुरस्कार नहीं मिला है, इसलिए अफसोस नहीं करना चाहिए.
रोनाल्डो 2003 से पुर्तगाल की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं. उनके पास दो फीफा विश्व कप खेलने का अनुभव है. उन्होंने अब तक पुर्तगाल के लिए कुल 109 मैच खेले हैं और कुल 47 गोल किए हैं. विश्व कप में वह केवल दो गोल कर सके हैं. एक गोल उन्होंने 2006 के विश्व कप में और दूसरा 2010 के विश्वकप में किया था. वह संयुक्त रूप से पुर्तगाल के लिए सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं. वे सबसे कम उम्र में 100 मैचों में देश का प्रतिनिधत्व करने वाले तीसरे यूरोपीय खिलाड़ी हैं. उनके पास फुटबॉल खेलने का एक दशक का अनुभव है. इस साल ब्राजील में होने वाले विश्व कप में उनकी प्रतिष्ठा दांव पर रहेगी. साथ ही उनके पास उनके पास खुद को सर्वश्रेष्ठ साबित करने का भी बेहतरीन मौका है. क्लब स्तर पर रोनाल्डो और मेसी दोनों बेहद सफल रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर दोनों ही खिलाड़ी बौने से नज़र आते हैं. रोनाल्डो अपने खेल के सबसे बेहतरीन दौर से गुजर रहे हैं. वह पुर्तगाल के कप्तान भी हैं. अपने कप्तान पर पुर्तगालियों को भरोसा है कि वही विश्व कप में उनकी नौका को पार लगा सकते हैं. एक परिपक्व और अनुभवी कप्तान से विश्व कप की आशा करना बेमानी नहीं है. देशवासियों की आशाओं का बोझ कंधों पर लिए रोनाल्डो कैसे विश्व चैंपियन बनते हैं, यह देखना बेहद दिलचस्प होगा. यदि रोनाल्डो ऐसा करने में कामयाब होते हैं तो वह मेसी से बहुत आगे पहुंच जाएंगे. आशा है कि उनके प्रदर्शन का यह दौर चलता रहेगा और इस साल ब्राजील में होने वाले फीफा विश्व कप में वो दनादन गोल करते दिखाई देंगे.
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